तारातरा मठ
तारातरा मठ बाड़मेर का इतिहास
स्वामी धर्मपुरी जी महाराज
स्वामी मोहन पुरी जी महाराज
मालाणी के महादेव के रूप में विख्यात श्री मोहन पुरी जी महाराज का जन्म तारातरा गांव में ही हुआ था। बचपन में उनके माता पिता ने उन्हें तारातरा मठ के महंत श्री धर्मपुरी जी महाराज का शिष्य बनाया। मोहन पुरी जी महाराज 12 वर्षों तक कई धार्मिक स्थलों पर रहे और वहां तपस्या की स्वामी जी वचन सिद्ध योगी पुरुष थे। तारातरा मठ के महंत श्री धर्मपुरी जी महाराज के देवलोक गमन के बाद श्री मोहन पुरी जी महाराज ने तारातरा मठ की गादी संभाली। स्वामी मोहनपुरी जी महाराज के चमत्कार पूरे विश्व में प्रसिद्ध है
स्वामी मोहनपुरी जी महाराज का गायो के प्रति अति स्नेह था उन्होंने कई गौशालाओं का निर्माण करवाया। बाड़मेर के दांता गांव में एक बड़ी गौशाला का निर्माण करवाया जिसका नाम श्री मोहन गोशाला है। इस गौशाला में हजारों की संख्या में गाय हैं जिसमें थारपारकर नस्ल की गाय भी है। स्वामी मोहनपुरी जी की प्रिय कामधेनु गौ माता तारातरा मठ में है। स्वामी जी जन कल्याण के लिए हमेशा कार्य करते रहे जब स्वामी मोहनपुरी जी महाराज देवलोक गमन हुए तब उनके शिष्य श्री प्रताप पुरी जी महाराज को तारातरा मठ के गादीपति बनाए गए थे। जो वर्तमान में तारातरा मठ के गादीपति है
